WhatsApp का CEO बनने की रेस में रहे नीरज अरोड़ा ने छोड़ी कंपनी

इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप के दोनों फाउंडर्स कंपनी पहले ही छोड़ चुके हैं ये तो आपको पता ही होगा. लेकिन कंपनी के पुराने कर्मचारी में से एक और चीफ बिजनेस ऑफिसर नीरज अरोड़ा ने भी वॉट्सऐप छोड़ने का ऐलान किया है. फेसबुक के अधिग्रहण के बाद धीरे धीरे कंपनी के पुराने आला अधिकारियों ने कंपनी छोड़ दी है.

इस साल के शुरुआत में जब वॉट्सऐप के सीईओ की खोज चल रही थी तो नीरज अरोड़ा को इस पद के लिए प्रबल दावेदार भी माना जा रहा था. हालांकि इन्हें सीईओ न बना कर क्रिस डेनियल्स को इस पद की जिम्मेदारी दी गई.

नीरज अरोड़ा ने फेसबुक पोस्ट में कहा है कि वो फैमिली के साथ समय बिताना चाहते हैं. उन्होंने कहा है, ‘समय बीतता है, लेकिन मेमोरीज नहीं. सात साल हो गए जब जेन और ब्रिएन ने मुझे वॉट्सऐप में रखा और यह सफर बेहतरीन था’

जेन और ब्रिएन ने मिल कर वॉट्सऐप की शुरुआत की थी और 2014 में इन्होंने अपनी कंपनी को फेसबुक से 19 बिलियन डॉलर में बेच दिया. पहले तो दोनों वॉट्सऐप के लिए काम करते रहे लेकिन एक एक करके दोनों ने ही वॉट्सऐप छोड़ दिया. दोनों ही फाउंडर्स के कंपनी छोड़ने की वजह फेसबुक और मार्क जकरबर्ग से अनबन बताई जाती है. क्योंकि जेन और ब्रिऐन प्राइवेसी को लेकर काफी गंभीर थे और वो इस प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन नहीं चाहते थे.

कुल मिला कर बात अब ये है कि फेसबुक ने अब पूरी तरह से वॉट्सऐप को अपनी जद में ले लिया है और अपनी तरह से चलाने की तैयारी है. शुरू में ऐसा नहीं था और जकरबर्ग ने इंश्योर किया था कि वॉट्सऐप इंडिपेंटेड तौर पर काम करेगा. लेकिन स्थिति बदल गई और जगजाहिर है.

प्रयागराज 6 वर्षों के अंतराल के बाद महाकुंभ के लिए तैयार हो रहा है. इससे पहले अयोध्या से लेकर काशी तक धार्मिक गतिविधियां चरम पर हैं. फरवरी में महाकुंभ का समापन होने के साथ ही देश में राजनीति के सबसे बड़े कुंभ लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बज उठेगा. आगामी चुनावों के कुछ अहम मुद्दों की रूपरेखा इन धर्म संसदों में परखी जा रही है. यहां बात बनी तो आगामी चुनावों के कुछ अहम एजेंडे इन धर्मसंसदों में तय कर दिए जाएंगे.

इस क्रम में काशी में रविवार को परम धर्म संसद की शुरुआत हुई. इस धर्म संसद में राम मंदिर की गूंज उठी. धर्माधीश ज्योतिष एवं शारदा द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने धर्म संसद की शुरुआत करते हुए कहा, "हम ये चाहते हैं कि आराध्य राम का मंदिर सबके साथ मिलकर बनाया जाए. हम किसी के साथ राग द्वेष से नहीं बल्कि श्रद्धा के द्वारा मंदिर बनाना चाहते हैं."

इस धर्म सभा से इतर नजदीक ही अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने भी एक धर्म संसद का आयोजन रविवार को किया. इस आयोजन से पहले वीएचपी ने दावा किया था कि धर्म सभा में लाखों की संख्या में लोग शामिल होंगे और यह सभा राम मंदिर के निर्माण में निर्णायक नतीजे लेकर आएगी. हालांकि ये दावे जमीनी हकीकत पर खरे उतरते नहीं दिख रहे हैं. बीबीसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वीएचपी का लाखों का दावा महज हजारों में सिमटता दिख रहा है.

काशी में बैठे शंकराचार्य ने अयोध्या की धर्म सभा पर निशाना साधते हुए कहा, "अयोध्या की धर्मसभा राजनीतिक है. ये स्मारक बनाना चाहते हैं और हम उपासना गृह. हम मुस्लिम विरोध के आधार पर नहीं खड़े हुए हैं. अयोध्या में धर्म सभा करने वाले राजनीतिक लोग हैं. कोई भी राजनीतिक पार्टी मंदिर बनाने की हैसियत में तब आएगी जब सत्तारूढ़ हो जाएगी लेकिन उसे ये शपथ लेनी पड़ेगी की हम धर्म निरपेक्ष रहेंगे. ऐसे में सत्ता में बैठे लोग मंदिर-मस्जिद बना ही नहीं सकते. हम लोगों ने कोर्ट में यह बात सिद्ध कर रखी है कि यह राम जन्मभूमि है. मामला सुप्रीम कोर्ट में अभी अटका है. एक दिन मिल बैठकर विचार कर लें तो मंदिर बन जाएगा."

Comments

Popular posts from this blog

दमिश्क में ईंधन भरा ट्रक दो यात्री बसों से टकराया, 30 लोगों की मौत

贵州湖南等地将有较强降水 甘肃西部等地有大风沙尘

英国防相称“硬实力”对付中国 首相谨慎表态