क़ासिम सुलेमानी के जनाजे़ में भगदड़, 35 लोगों की मौत, 48 घायल

बीते शुक्रवार को इराक़ में अमरीकी ड्रोन हमले में मारे गए ईरान के सैन्य कमांडर क़ासिम सुलेमानी के जनाजे़ में भगदड़ की मचने से कम से कम 35 लोग मारे गए हैं.

ईरानी मीडिया के अनुसार, इस घटना में अब तक 35 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 48 से ज़्यादा ज़ख़्मी हैं. यह हादसा उस समय हुआ जब केर्मान शहर में सुलेमानी के जनाज़े में शिरकत के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे.

सुलेमानी केर्मान शहर से ही थे. उनके शव को इराक़ से पहले अहवाज़, फिर तेहरान और अब केर्मान लाया गया है. यहीं उनका अंतिम संस्कार होगा.

ईरान की आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख ने कहा कि जनरल क़ासिम सुलेमानी के जनाज़े के दौरान मची भगदड़ में कई लोगों की मौत हुई है.

सरकारी समाचार एजेंसी आईआरआईबी न्यूज़ से पीरहोसेन कोलिवंद ने कहा, "दुर्भाग्य से, भगदड़ में कई लोगों की जान गई है. कुछ लोग घायल भी हुए हैं जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है."

सुलेमानी को ईरान के सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई के बाद दूसरा सबसे शक्तिशाली शख़्स माना जाता था जबकि अमरीका उन्हें अपने सैनिकों की मौत के लिए ज़िम्मेदार 'आतंकवादी' मानता था.

जनरल सुलेमानी क़ुद्स फ़ोर्स नाम की एक सैन्य टुकड़ी के प्रमुख थे. ये टुकड़ी एक तरह से विदेश में ईरान की सेना के जैसी है जो अलग-अलग देशों में ईरानी हितों के हिसाब से किसी का साथ तो किसी का विरोध करती है.

इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि ईरान में कहने को विदेश मंत्री होता है, लेकिन असल विदेश मंत्री की भूमिका क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख ही निभाते हैं.

जनरल सुलेमानी लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर अभियानों की अगुआई करते रहे, मगर कुछ साल पहले वो ख़ुलकर सामने आए और इसके बाद वो ईरान में इतने लोकप्रिय हो गए कि उनके ऊपर लेख लिखे गए, डॉक्यूमेंट्रियाँ बनीं और यहाँ तक कि पॉप गीत भी बनने लगे.

अमरीका के लिए उनका मारा जाना इतनी बड़ी बात थी कि ख़ुद राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किया जिसमें केवल अमरीकी राष्ट्रध्वज की तस्वीर थी - यानी इस घटना को एक तरह से राष्ट्रपति ट्रंप अमरीका का राष्ट्रीय गौरव की तरह पेश कर रहे थे.

अमरीका ने क़ुद्स फ़ोर्स को 25 अक्तूबर 2007 को ही आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था और इस संगठन के साथ किसी भी अमरीकी के लेनदेन किए जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया.

सुलेमानी के मारे जाने के बाद ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने एक बयान जारी कर कहा कि ईरान और दूसरे देश इसका बदला लेंगे.

ईरान के सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह ख़ामेनेई के नेतृत्व में सोमवार को तेहरान में जनाज़े की नमाज़ अदा की गई थी. इसमें राष्ट्रपति हसन रूहानी, मुख्य न्यायाधीश, संसद के स्पीकर अली लारीजानी सहित वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए.

इससे पहले क़ासिम सुलेमानी सहित सभी मृतकों के शवों को ईरान के खोजिस्तान प्रांत के अहाज हवाई अड्डे पर लाया गया था, जहां रविवार को अंतिम संस्कार के जुलूस में लाखों लोग शामिल हुए थे.

सोमवार को तेहरान में उनके अंतिम संस्कार की पूर्व संध्या पर, शहर के राजमार्ग और सड़कें पर काला ही रंग नज़र आया.

उमड़ी भीड़ ने ईरानी झंडे फहराए और अमरीका विरोधी नारे लगाए. इसके बाद इनके शव को उनके पैतृक शहर केर्मान लाया गया है.

बीते शुक्रवार को इराक़ में अमरीकी ड्रोन हमले में मारे गए ईरान के सैन्य कमांडर क़ासिम सुलेमानी के जनाजे़ में भगदड़ की मचने से कम से कम 35 लोग मारे गए हैं.

ईरानी मीडिया के अनुसार, इस घटना में अब तक 35 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 48 से ज़्यादा ज़ख़्मी हैं. यह हादसा उस समय हुआ जब केर्मान शहर में सुलेमानी के जनाज़े में शिरकत के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे.

सुलेमानी केर्मान शहर से ही थे. उनके शव को इराक़ से पहले अहवाज़, फिर तेहरान और अब केर्मान लाया गया है. यहीं उनका अंतिम संस्कार होगा.

ईरान की आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख ने कहा कि जनरल क़ासिम सुलेमानी के जनाज़े के दौरान मची भगदड़ में कई लोगों की मौत हुई है.

सरकारी समाचार एजेंसी आईआरआईबी न्यूज़ से पीरहोसेन कोलिवंद ने कहा, "दुर्भाग्य से, भगदड़ में कई लोगों की जान गई है. कुछ लोग घायल भी हुए हैं जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है."

सुलेमानी को ईरान के सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई के बाद दूसरा सबसे शक्तिशाली शख़्स माना जाता था जबकि अमरीका उन्हें अपने सैनिकों की मौत के लिए ज़िम्मेदार 'आतंकवादी' मानता था.

जनरल सुलेमानी क़ुद्स फ़ोर्स नाम की एक सैन्य टुकड़ी के प्रमुख थे. ये टुकड़ी एक तरह से विदेश में ईरान की सेना के जैसी है जो अलग-अलग देशों में ईरानी हितों के हिसाब से किसी का साथ तो किसी का विरोध करती है.

इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि ईरान में कहने को विदेश मंत्री होता है, लेकिन असल विदेश मंत्री की भूमिका क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख ही निभाते हैं.

जनरल सुलेमानी लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर अभियानों की अगुआई करते रहे, मगर कुछ साल पहले वो ख़ुलकर सामने आए और इसके बाद वो ईरान में इतने लोकप्रिय हो गए कि उनके ऊपर लेख लिखे गए, डॉक्यूमेंट्रियाँ बनीं और यहाँ तक कि पॉप गीत भी बनने लगे.

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